Malabar Gold Faces Boycott
Malabar Gold Faces Boycott Malabar Gold विवाद सोशल मीडिया पर छाया हुआ है। पाकिस्तानी इन्फ्लुएंसर संग जुड़ाव पर #BoycottMalabarGold ट्रेंड हुआ और कोर्ट ने एक्टिविस्ट अकाउंट ब्लॉक किया। जानिए पूरी खबर।
Malabar Gold & Diamonds ने विवाद के बाद तुरंत जिम्मेदारी दिखाई। कंपनी ने स्पष्ट किया कि उनका किसी राजनीतिक एजेंडे से संबंध नहीं है और वे भारत के कानून, संस्कृति और उपभोक्ताओं के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं। उन्होंने विवादित इन्फ्लुएंसर से जुड़ा सहयोग तुरंत समाप्त किया और पारदर्शिता के साथ अपनी गलती सुधारी। यह दिखाता है कि मलाबार गोल्ड एक जिम्मेदार और संवेदनशील ब्रांड है जो ग्राहकों के विश्वास को सर्वोपरि मानता है।
Malabar Gold Faces Boycott
मलाबार गोल्ड” विवाद: पाकिस्तानी इन्फ्लुएंसर से जुड़ाव भारत में त्यौहारों का मौसम हो और सोना-चाँदी की खरीदारी न हो, ऐसा शायद ही कभी होता है। लेकिन इस बार धनतेरस 2025 से पहले देश की मशहूर ज्वेलरी कंपनी Malabar Gold & Diamonds को भारी विवाद का सामना करना पड़ा। Malabar Gold Faces Boycott मामला एक पाकिस्तानी इन्फ्लुएंसर के साथ उनके सहयोग से जुड़ा है, जिसने सोशल मीडिया पर एक बड़े #BoycottMalabarGold ट्रेंड को जन्म दे दिया। इसके साथ ही एक सामाजिक कार्यकर्ता का अकाउंट कोर्ट के आदेश से ब्लॉक होने पर यह मुद्दा और भी चर्चा में आ गया।
विवाद की जड़ Malabar Gold Faces Boycott: पाकिस्तानी इन्फ्लुएंसर अलीशबा खालिद
Malabar Gold Faces Boycott पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब मलाबार गोल्ड एंड डायमंड्स ने यूनाइटेड किंगडम के बर्मिंघम शहर में अपने नए शोरूम के उद्घाटन के लिए पाकिस्तानी मूल की सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अलीशबा खालिद (Alishba Khalid) को आमंत्रित किया।
अलीशबा एक लोकप्रिय इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर हैं जिनके करीब 1.3 लाख फॉलोअर्स हैं और वे अक्सर लक्ज़री ब्रांड्स और फैशन ब्रांड्स के साथ काम करती हैं।
लेकिन जब भारतीय सोशल मीडिया यूज़र्स ने पाया कि अलीशबा ने अपने पुराने पोस्ट्स में भारत के खिलाफ टिप्पणियाँ की थीं — विशेषकर जम्मू-कश्मीर और भारत-पाक संबंधों पर — तो यह सहयोग लोगों को नागवार गुज़रा।
कई यूज़र्स ने उनके पुराने ट्वीट्स और पोस्ट्स शेयर किए, जिनमें उन्होंने पाकिस्तान का समर्थन किया था और भारतीय नीतियों की आलोचना की थी।
यही वह बिंदु था जहाँ से सोशल मीडिया पर गुस्सा फूट पड़ा और #BoycottMalabarGold तेजी से ट्रेंड करने लगा।

Malabar Gold Faces Boycott सोशल मीडिया पर बहिष्कार की मुहिम
सोशल मीडिया यूज़र्स ने कंपनी पर “पाकिस्तान समर्थक” होने का आरोप लगाया और ब्रांड से दूरी बनाने की अपील की।
ट्विटर (अब X) और इंस्टाग्राम पर हजारों लोगों ने कहा कि त्यौहारों के समय जब भारत में सोना खरीदने की परंपरा होती है, तब किसी ऐसे व्यक्ति को ब्रांड प्रमोशन के लिए चुनना जो भारत विरोधी विचार रखता है, यह “राष्ट्रभावना के खिलाफ” है।
मामला इतना बढ़ा कि कई लोगों ने मलाबार के शोरूम्स का बहिष्कार करने की अपील कर दी। कुछ ने तो यह तक कहा कि वे अब सिर्फ “भारतीय मूल” ब्रांड्स से ही खरीदारी करेंगे।
Malabar Gold Faces Boycott अदालत की दखलअंदाजी
Malabar Gold Faces Boycott इस विवाद के बाद मलाबार गोल्ड ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की। कंपनी ने अदालत से कहा कि सोशल मीडिया पर उसके खिलाफ “गलत और अपमानजनक” सामग्री फैलाई जा रही है जो उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचा रही है।
मलाबार गोल्ड ने लगभग 442 URL की सूची पेश की, जिनमें ऐसे पोस्ट शामिल थे जो ब्रांड को “पाकिस्तान समर्थक” बताते थे।
अदालत ने कंपनी की याचिका पर विचार करते हुए अंतरिम निषेधाज्ञा (ad-interim injunction) जारी की और सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स — जैसे X (ट्विटर), फेसबुक, इंस्टाग्राम और गूगल — को निर्देश दिया कि वे इस प्रकार की सामग्री हटाएँ।
साथ ही, एक सोशल मीडिया एक्टिविस्ट विजय पटेल का अकाउंट भारत में कोर्ट के आदेश के तहत “withheld” कर दिया गया क्योंकि उन्होंने ब्रांड के खिलाफ कई पोस्ट किए थे।
इस कदम ने सोशल मीडिया पर “फ्रीडम ऑफ स्पीच” बनाम “ब्रांड प्रोटेक्शन” की बहस को जन्म दे दिया।
Malabar Gold Faces Boycott कंपनी का पक्ष
मलाबार गोल्ड एंड डायमंड्स ने एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि—
“यूके में हुए इवेंट के लिए हमने एक लोकल एजेंसी को हायर किया था जिसने कई इन्फ्लुएंसर्स को आमंत्रित किया। हमें इस बात की जानकारी नहीं थी कि उनमें से एक पाकिस्तानी मूल की हैं या उन्होंने किसी राजनीतिक बयानबाजी की है।”
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि जैसे ही उन्हें इस विवाद का पता चला, उन्होंने उस एजेंसी को ब्लैकलिस्ट कर दिया और अलीशबा खालिद से जुड़ा हर कंटेंट हटाने का निर्देश दिया।
मलाबार गोल्ड ने आगे कहा कि वे भारत के प्रति पूरी तरह समर्पित ब्रांड हैं और उनका किसी भी राजनीतिक एजेंडे से कोई संबंध नहीं है।
ब्रांड इमेज और त्योहारों पर असर
यह विवाद ऐसे समय आया जब भारत में सोना खरीदने का सबसे बड़ा सीजन — धनतेरस और दीवाली — चल रहा था।
ब्रांड की छवि को नुकसान पहुँचने से ग्राहकों में असमंजस की स्थिति बनी।
कई लोगों ने कहा कि अब वे खरीदारी के लिए अन्य भारतीय ब्रांड्स जैसे तनिष्क, कल्याण ज्वेलर्स या जॉयलुकास का रुख करेंगे।
मार्केटिंग विशेषज्ञों का कहना है कि किसी ब्रांड के लिए ऐसे विवाद न केवल बिक्री को प्रभावित करते हैं बल्कि ब्रांड ट्रस्ट पर भी दीर्घकालिक असर डालते हैं।

सोशल मीडिया और अभिव्यक्ति की आज़ादी
Malabar Gold Faces Boycott इस पूरे विवाद ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया —
क्या सोशल मीडिया पर ब्रांड की आलोचना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अंतर्गत आती है, या जब वह झूठे आरोपों में बदल जाए तो अदालत का हस्तक्षेप सही है?
कई लोगों ने कोर्ट के आदेश को सही बताया, तो कईयों ने कहा कि यह “आलोचना को दबाने” की कोशिश है।
हालाँकि, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जब कोई पोस्ट झूठे तथ्यों या अपमानजनक सामग्री पर आधारित हो, तब ब्रांड को अपनी साख बचाने के लिए अदालत में जाने का अधिकार होता है।
विवाद की शुरुआत सितंबर में हुई, जब कंपनी ने लंदन में अपने नए शो रूम के उद्घाटन के लिए पाकिस्तानी मूल की सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अलीशबा खालिद के साथ प्रमोशन किया था. अलीशबा ने पहले भारत के ऑपरेशन सिंदूर को ‘कायरता भरा कदम’ कहा था, जिसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने मालाबार गोल्ड पर पाकिस्तान समर्थक होने के आरोप लगाए.(Malabar Gold & Diamonds) विवादों में घिर गई है.
इस विवाद से सीख
- ब्रांड्स को सतर्क रहना होगा – किसी भी प्रमोशनल सहयोग से पहले इन्फ्लुएंसर या एजेंसी की पूरी पृष्ठभूमि जाँचना आवश्यक है।
- सामाजिक भावनाओं की संवेदनशीलता – भारत जैसे देश में राष्ट्रवादी भावनाएँ बेहद प्रबल हैं, इसलिए मार्केटिंग में संवेदनशीलता जरूरी है।
- सोशल मीडिया की शक्ति – एक गलत निर्णय कुछ ही घंटों में सोशल मीडिया पर ट्रेंड बन सकता है, जो सालों की प्रतिष्ठा पर असर डाल देता है।
- कानूनी संतुलन – आलोचना और मानहानि के बीच की रेखा बहुत महीन है, इसलिए दोनों पक्षों को जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करना चाहिए।