संचार साथी
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संचार साथी (Sanchar Saathi) — क्या है और क्यों बनी ?

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संचार साथी क्यों बना ?

संचार साथी भारत सरकार द्वारा शुरुआत 2025 में लॉन्च किया गया Sanchar Saathi ऐप, एक नागरिक-केंद्रित (citizen-centric) डिजिटल पहल है। इसका मकसद है कि हर मोबाइल यूज़र — चाहे नया फ़ोन लिया हो या पुराना — — अपने फोन, मोबाइल कनेक्शन और साइबर सुरक्षा से जुड़ी जानकारी खुद चेक कर सके।

संचार साथी यह ऐप और पोर्टल — दोनों उपलब्ध हैं — और मुख्य सुविधाएँ इस प्रकार हैं:
  • संचार साथी किसी भी हैंडसेट की IMEI (यानी फोन की यूनिक पहचान) चेक करना, यह जानने के लिए कि फोन असली (genuine) है या ब्लैकलिस्टेड / फर्जी है।
  • अगर फोन खो गया हो या चोरी हो गया हो, तो उसे ब्लॉक करना या ट्रेस करना।
  • संचार साथी यह देखना कि आपके नाम पर कौन-कौन सी मोबाइल कनेक्शन / सिम जारी की गई हैं — यानी, unauthorized या फेक connections को चेक करना।
  • संदेहित धोखाधड़ी (scam calls / spam messages) की रिपोर्ट करना — ऐप में “चक्षु (Chakshu)” नाम की सुविधा है जिसके जरिए यूज़र कॉल या SMS लॉग से ही रिपोर्ट दर्ज कर सकते हैं।
संचार साथी सरकार का तर्क है कि ऐसे उपायों से देश में बढ़ते IMEI धोखाधड़ी, चोरी हुए फोन, फर्जी सिम और फ्रॉड कॉल्स/मैसेजेस से निजात मिलेगी — और आम नागरिक सुरक्षित रह सकेंगे।
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अब तक का सफर: डाउनलोड, प्रभाव और उपयोग !

  • Sanchar Saathi ऐप जनवरी 2025 में लॉन्च हुआ था।
  • 29 जुलाई 2025 को ऐप को हिंदी एवं 21 अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के साथ लॉन्च किया गया — ताकि भारत के विविध भाषाई क्षेत्रों के लोग इसे आसानी से इस्तेमाल कर सकें।
  • लॉन्च के लगभग 6 महीने में, यानी अगस्त 2025 तक, ऐप ने 50 लाख डाउनलोड का मुक़ाम पार कर लिया।
  • सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए आँकड़ों के अनुसार: इस ऐप के ज़रिए लाखों नकली या अवैध फोन कनेक्शनों को ब्लॉक / डिस्कनेक्ट किया गया; चोरी या खोए हुए फोन रिकवर हुए; कई फ्रॉड नंबरों, सिम्स, और IMEI को ब्लैकलिस्ट किया गया।
  • उदाहरण के लिए: अधिसूचना में कहा गया है कि 5.35 लाख से ज़्यादा खोए/चोरी हुए मोबाइल हैंडसेट रिकवर हुए; 1 करोड़ से ज़्यादा अनधिकृत मोबाइल कनेक्शन्स बंद हुए; “चक्षु (Chakshu)” फीचर के ज़रिए 29 लाख से ज़्यादा नंबरों को फ़्लैग किया गया।
  • इसके अलावा, पोर्टल ने 16.7 करोड़ से ज़्यादा विज़िट दर्ज की हैं, जो दिखाता है कि आम जनता में इस प्लेटफार्म पर भरोसा बना है।

संचार साथी कुल मिलाकर, शुरूआती परिणाम सकारात्मक दिखते हैं — ऐप ने नकली/चोरी हुए फोन + कनेक्शन की समस्या में एक सार्वजनिक सुरक्षा बाँध का काम किया है।

संचार साथी
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संचार साथी दिसंबर 2025: नया आदेश, विवाद और बहस !

हालाँकि शुरुआत में Sanchar Saathi को एक वैकल्पिक (optional) सुरक्षा उपकरण के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन दिसंबर 2025 में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया — अब हर नया स्मार्टफोन, जो भारत में बेचा जाएगा, उसमें Sanchar Saathi ऐप प्री-इंस्टॉल (pre-install) करना होगा।

  • संचार साथी आदेश के तहत, स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों — जैसे कि Apple, Samsung, Xiaomi, Vivo, Oppo आदि — को 90 दिनों के अंदर नए फोन में ऐप शामिल करना होगा, और पहले से दुकानों में रखे फोन या स्टॉक में फोन के लिए — सॉफ़्टवेयर अपडेट के ज़रिए ऐप जोड़ना होगा।
  • सरकार का कहना है कि ऐप को छुपाया नहीं जाना चाहिए, इसे हाइड या डिसेबल नहीं किया जाना चाहिए, और सभी फीचर्स काम कर रहे होने चाहिए।
  • लेकिन इस आदेश के बाद “गोपनीयता (privacy)” और “स्वतंत्रता (freedom to choose)” से जुड़े बड़े सवाल उठ गए। कुछ लोग इसे “निगरानी उपकरण (surveillance tool)” कह रहे हैं।

सरकार की सफाई –

इस विवाद के बाद, केंद्रीय दूरसंचार मंत्री Jyotiraditya Scindia ने कहा है कि ऐप उपयोग करने या न करने का फैसला पूरी तरह यूज़र का है — यानी, “optional” है। यदि कोई चाहे, तो ऐप को अपने फोन से हटा (uninstall) भी सकता है।

मंत्री का कहना है कि इस पहल का मकसद नागरिकों की सुरक्षा है — ताकि वे ऑनलाइन धोखाधड़ी, ग़लत सिम या फोन कनेक्शन, चोरी-चोरी या ब्लैकलिस्टेड फोन की समस्या से बच सकें।

संचार साथी विवादित पहलू: गोपनीयता, भरोसा और चिंताएँ-

हालाँकि Sanchar Saathi के उद्देश्य सकारात्मक हैं, इस नई पॉलिसी — यानी अनिवार्य प्री-इंस्टॉल + उसके बाद “किया यूज़र चाहे हटाए” — ने कई तरह की आलोचनाएँ और विवाद खड़े कर दिए हैं।

  • विरोधियों और गोपनीयता अधिवक्ताओं (privacy advocates) का तर्क है कि अगर ऐप हर फोन में पूर्व-स्थापित हो और उसे हटाना मुश्किल या परेशानी भरा बने, तो देश में निगरानी का एक नया तंत्र स्थापित हो जाएगा। वे इसे “गोपनीयता का उल्लंघन” या “स्मार्टफोन सर्वाइलेन्स” का पहला कदम मानते हैं।
  • कुछ का कहना है कि सरकार द्वारा दी गई सफाई (कि आप हटाना चाहते हैं तो हटा सकते हैं) से भरोसा कम हुआ है — क्योंकि मूल आदेश कहता था कि ऐप को “हाइड, डिलीट या डिसेबल” नहीं करना चाहिए। इसलिए यह सवाल उठता है कि आखिर में कितना “वैकल्पिक” (optional) रहेगा।
  • तकनीकी विशेषज्ञों और नागरिक अधिकार समूहों को डर है कि ऐप द्वारा मांगी जाने वाली परमिशन — जैसे कॉल/मैसेज लॉग, सिम/IMEI डिटेल्स आदि — का दुरुपयोग हो सकता है। अगर यह डाटा सरकार या किसी तृतीय पक्ष के हाथों में पहुंच जाए, तो निजता (privacy) प्रभावित हो सकती है।
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संचार साथी कई लोग इसे तुलना कर रहे हैं उन विवादास्पद निगरानी ऐप्स से, जिनके कारण सरकारों पर भरोसा कम होता है — और इस वजह से एक स्वस्थ लोकतांत्रिक बहस छिड़ चुकी है।

संचार साथी आम यूज़र के लिए — फायदे और सावधानियाँ !

फायदे:

  • अगर आप नया मोबाइल खरीद रहे हैं, तो Sanchar Saathi की मदद से आप IMEI और फोन की वैधता चेक कर सकते हैं — जिससे आप चोरी या ब्लैकलिस्टेड फोन से बच सकें।
  • अगर आपका फोन खो गया है या चोरी हो गया है — ऐप की मदद से उसे ब्लॉक / ट्रेस करना संभव है।
  • यदि आपके नाम पर बगैर आपकी जानकारी के सिम जारी हो गई है — ऐप के ज़रिए आप देख और रिपोर्ट कर सकते हैं।
  • किसी भी संदेहित कॉल या मैसेज को तुरंत रिपोर्ट करके, आप खुद को सामने आने वाले फ्रॉड या धोखाधड़ी से बचा सकते हैं।

सावधानियाँ / ध्यान देने योग्य बातें:

  • ऐप इंस्टॉल करते समय और पहली बार इस्तेमाल करते समय, ऐप द्वारा मांगी गई परमिशन और डेटा ऐक्सेस को ध्यान से चेक करें। कॉल-लॉग, मैसेज-लॉग जैसी निजी जानकारी देने से पहले सोचें।
  • यदि आप नियमित रूप से अपने फोन में प्राइवेसी को महत्त्व देते हैं — ऐप की सेटिंग्स देखें, क्या आप रिपोर्टिंग फीचर्स का इस्तेमाल करना चाहते हैं या नहीं।
  • अगर आप नहीं चाहते — आप ऐप को अपने फोन से हटा भी सकते हैं (अगर सरकार की क्लियरि़फिकेशन अनुसार वह विकल्प उपलब्ध है)।

निष्कर्ष: सुरक्षा और निजता — संतुलन बनाना ज़रूरी !

Sanchar Saathi एक महत्वाकांक्षी पहल है — देश के करोड़ों मोबाइल-यूज़र्स को फ्रॉड, धोखाधड़ी, चोरी, फर्जी कनेक्शन जैसी समस्याओं से बचाने के उद्देश्य से। ऐप ने अब तक लाखों फोन, नंबर, सिम ब्लॉक/रिकवर करने और धोखाधड़ी रोकने में निश्चित रूप से काम किया है।

लेकिन — किसी भी बड़े सिस्टम की तरह — इसमें जोखिम भी हैं। यदि उपयोगकर्ता सूचना के प्रति सजग नहीं रहे, या ऐप का दायरा समझे बिना परमिशन दे दे — तो इससे निजता प्रभावित हो सकती है। सरकार और नागरिक — दोनों को मिलकर इस संतुलन (balance) को बनाए रखना होगा।

अभी जैसा आदेश हुआ है — “हर फोन पर प्री-इंस्टॉल + पर हटाने की छूट” — वह एक यथार्थवादी संतुलन जैसा लगता है। लेकिन साथ ही, यह नागरिकों की समझ और जागरूकता पर निर्भर करेगा कि वे इस सुविधा का उपयोग सही तरीके से करें।

आपकी राय: आप क्या सोचते हैं ?

क्या आपको लगता है कि Sanchar Saathi जैसे ऐप से मोबाइल फ्रॉड, चोरी और फर्जी कनेक्शन वाकई कम होंगे — या यह निजता के लिए खतरा बन सकता है?
क्या आप खुद इसे अपने फोन में रखना पसंद करेंगे — या डिलीट कर देंगे?

अगर आप चाहें — तो मैं इस ब्लॉग को और विस्तार दे सकता हूँ — जैसे: “कैसे ठीक से Sanchar Saathi सेट करें”, “कौन-कौन सी परमिशन सावधानी से दें/न दें”, “भारत में इससे जुड़ी कानूनी बातें” आदि।
आप अपनी राय कमेंट में लिखिए — और हम मिलकर इस पर आगे चर्चा कर सकते हैं।

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